बेहतर स्वास्थ्य के लिए तरह – तरह की पोषक रोटियां

रोटी या चपाती गुणों की खान है। साबुत गेहूं के आटे की रोटी, सिलेनियम, विटामिन ई व रेशे से सम्पन्न होती है जो दिल की बीमारी व कैंसर के खतरों को कम करती है।

क्या आप रोटियां खाना पसंद करते हैं किन्तु वजन बढ़ने से डरते हैं? आइए..., सादा रोटी को और अधिक पोषित और स्वादिष्ट बनाने की बात करते हैं। रोटी के ये स्वस्थ विकल्प, उपयुक्त मात्रा में बतौर संतुलित देसी आहार प्रयोग किए जा सकते हैं।

बच्चों का खाने के बारे में मीन-मेख निकालना अथवा स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं जैसे बच्चों में कब्ज आदि रोगों का हमें सामना करना पड़ता है। विभिन्न प्रकार के भरावन से युक्त रोटियां बच्चों के लंच बॉक्स का हिस्सा बन सकती हैं। ये रोटियां छोटे बच्चों के भोजन को रेशे के साथ आवश्यक विटामिन व खनिज प्रदान करती हैं।

हरी रोटियां

क्यूं न हरे के प्रेम को हमारी मूल रोटी तक बढाएं। साग, हरी पत्तेदार सब्जियों को देश में विभिन्न प्रादेशिक पाक-शैलियों में अभिन्न स्थान प्राप्त है।

पत्तेदार सब्जियां जैसे अमरनाथ पत्तियां (चौलाई का साग), मेथी, पालक, हरा धनिया, पुदीना, हरा प्याज, साबुत गेहूं के आटे में गूंथते हुए मिलाए जा सकते हैं। इसे हरी रोटियों में परिवर्तित किया जा सकता है। ये रोटियां पोषक तत्वों जैसे आयरन (लौह), विटामिन सी, बीटा कैरोटीन (शाकाहारी स्रोतो मे विटामिन ए के रूप में) पोटाशियम व बहुत से अन्य महत्वपूर्ण खनिजों से भरपूर होंगी। मेथी व पालक को पोषण की दृष्टि से चार्ट में सर्वोपरि स्थान दिया जाता है जब हम हरी सब्जियों की बात करते हैं तो बहुत सी ऐसी हरी सब्जियां है जिन्हें अबतक समुचित श्रेय नहीं दिया गया। राष्ट्रीय अनुसंधान बताते हैं कि अमरनाथ पत्तियां कोलेस्ट्राल स्तर को कम करती हैं, एनीमिया यानी खून की कमी को दूर करती हैं, पेचि‍श को रोकने में सहायक होती हैं व कैंसर जैसी बीमारियों से बचाती हैं, इसलिए इस सूची की शुरुआत में ही ‘चौलाई के साग’ को पोषित रोटियों की श्रेणी में शामिल किया गया है।

मिश्रित आटा रोटियां

प्रतिदिन की रोटी के लिए मल्टीग्रेन (Multigrain) आटा घर पर तैयार किया जा सकता है। विभिन्न आटों जैसे जौ का आटा, बाजरा, रागी, काला चना आटा, मकई आटा, सोया को सामान्यतया इस्तेमाल किए जाने वाले गेहूं के आटे में मिलाने से लौह, कैल्शियम, फास्फोरस सम्पन्न चमत्कारी भोजन के रूप में बदला जा सकता है। बाजरा कैल्शियम व लौह से भरपूर है व हड्डियों के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। रागी मे रेशे व लौह प्रचुरता से पाया जाता है और शिशु भी इसे सरलता से पचा सकते हैं। इन आटों को विकल्प के तौर पर रोटी मे मिलाने से यह हड्डियों के स्वास्थ्य, स्वस्थ दांतों के लिए लाभदायक होंगे और खून की कमी को दूर करेंगे।

बीज की रोटियां

भुने हुए अलसी के बीजों को गेहूं के आटे की रोटियों में मिलाने से आटे में रेशा (Fibre), आक्सीकरणरोधी व ओमेगा 3 फैटी एसिड की मात्रा से भरपूर बनाता है जो एक अदभुत विकल्प बन सकता है। ओमेगा 3 एसिड हमें दिल की बीमारी, आर्थटाइटिस, अस्थमा, मधुमेह व कैंसर से बचाता है। अलसी के बीच घुलनशील व अघुलनशील रेशों (Fibre) का उन्नत स्रोत है जो कोलेस्ट्रोल स्तर कम करता है, रक्त शर्करा को स्थिर रखता है व पाचन मे सहायक है। अलसी बीज मे फिटोकैमीकल्स, लिग्नैन्सो प्रचुरता में होते हैं। ये तत्व प्रजनन में सहायक हैं, रजोनिवृति सम्बंधी खतरों को कम करते हैं, स्तन कैंसर व मधुमेह से बचाते हैं।

काले तिल व सफेद तिल भी रोटी को कैल्शियम से भरपूर बनाते हैं। सफेद ति‍ल से कैल्शियम और काले तिल से लौह तत्व प्राप्त होगा। इन्हें रोटी में मिलाया जा सकता है। तरबूज के बीजों का चूरा (Powder) कदाचित रोटी के आटे को बेहतरीन स्वाद प्रदान करेगा।

औषधीय मसालेदार रोटी

भारतीय मसालों में औषधीय गुण है। जैसे जख्म उपचारात्मक, खांसी व सर्दी से बचाव, पाचन में सहायक, दिल की बीमारी से बचाव। ये मसाले हैं... हल्दी (पिसी हुई), काली मिर्च, जीरा, सौफ, अजवाइन, सूखी कसूरी मेथी। सादा रोटी की तुलना में इन्हें साथ मिलाने से आपको स्वादिष्ट, सुगधित व मसालेदार (तीखा नहीं) रोटी बनाने मे सहायता मिलेगी

पूर्ण रोटी

कोई भी भोजन कार्बोहाइड्रेट व प्रोटीन की संतुलित मात्रा के पूर्ण नहीं है। पोषक रोटी के जरिए प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट दोनों की प्राप्ति होगी। इस प्रकार रोटी एक क्विक फिक्स मील (अथवा तुंरत तैयार किया जाने वाला पूर्ण भोजन के रूप में उपलब्ध‍ होगी)। प्रोटीन सम्पन्न खाद्य जैसे कच्चा पनीर (cottage cheese), टोफू (सोया पनीर), पकी हुई मूंग दाल, मसूर दाल, तूर दाल, रोटियों को प्रोटीन से भरपूर बनाएगी।

(लेखिका आहार विज्ञ हैं। लेख में व्यक्त विचार निजी हैं।)


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